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Saturday, 9 June 2007

ये मधुशाला है या ---

प्रेस क्लब मे छत्तीसगढ़ शासन कि तरफ से एक मीटिंग थी। मुझे अभी छत्तीसगढ़ कि बीट मिली हुई है, इसलिये वह जाने का शरफ हासिल हुआ। पत्रकारिता कि पढाई के दौरान हमने प्रेस क्लब ऑफ़ इंडिया के बारे मे काफी बाते कि थी। वह क्लब जैसा है। वहा नामी पत्रकार आते है। गम्भीर मुद्दों पर बातचीत होती है, बहस , मुबाहसे का दौर चलता है।
- यही सब सोचते हुए कैब से क्लब पहुँचा। अन्दर शराबखाने जैसा सीन था। जैसा फिल्मो मे नजर आता है वैसा ही यहाँ भी नजर आया। छोटे छोटे गोल मेज पर नामी गिरामी सहाफी बैठे थे। मेज पर तरह कि बोतले बोतले रखी थी। एक दो लोग पी कर इस तरह झूम रहे थे जैसे बार मे हो और सुरूर मे मदहोश हो गए हो। किसी तरह बचते बचाते बगल वाले कमरे मे गया। वही प्रेस कांफ्रेस होने वाली थी। रूम चारो तरफ से बंद था, और एसी खराब था। हेलिकॉप्टर जैसे आवाज करने वाला एक पंखा पुरी ताकत लगा कर शोर मचा रहा था।
- खैर मैंने अपना काम पुरा किया। और फिर उन मेजो से बचते बचाते वापस बाहर आ गया।
- एक नया सच आखो के सामने आया। खैर अभी तो शुरुआत है, इस तरह के न जाने कितने सच से रूबरू होने का मौका मिलेगा। तब तक इसी तरह बया होंगी ज़माने कि हक़ीकत।