Monday, 4 June 2007

एक रिपोर्ट

हाल ही मे National Commission for Religions and Linguistic Minorities (NCRLM) ने अल्प्संख्य्को से सम्बंधित एक रिपोर्ट सरकार को सौपी है। हालाकि ये अभी तक सार्वजनिक नही हुई है है। लेकिन इसमे भारत मे अल्प्संख्य्को कि स्थिति के बारे मे बताया गया है। और इसमे सुधार लाने के लिये सिफरिशे कि गयी है। जैसा कि हमेशा से होता आया है , इस पर राजनीती शुरू हो गई है।

- जरा एक नजर उन लफ्जो पर जिसके तहत संविधान ने अल्प्संख्य्को कि परिभाषा दी है।
---Minority as a group numerically inferior to the rest of the population in a non-dominant position.
- परिभाषा के हिसाब से तो हिन्दुओ के अलावा भारत मे रहने वाले बाकी सभी धर्मो के लोग अल्पसंख्यक है। हिन्दुओ कि आबादी कुल जनसंख्या का ८० फीसदी है। ऐसे मे ये राज्य कि जिम्मेदारी है कि वो अल्प्संख्य्को कि तरक्की के लिये नियम बनाए।
- भारत का संविधान भी अल्प्संखय्को कि तरक्की के लिये पर्याप्त आजादी देता है। Article १६(४), Article 30, राज्यों को ये अख्तियार देता है कि वो इन लोगो के विकास के लिये योजनाये बनाए। लेकिन इसका उल्टा हो रह है।
- जब भी अल्प्संखय्को के विकास कि बात होती है तो " रामलीला मंडली " BJP को राजनीती करने का मौका मिल जाता है। सच्चर समिति कि रिपोर्ट पर इस मंडली ने कितना हो हल्ला मचाया था ये किसी से छुपा नही है। UP के election के समय CD का खेल सभी ने देखा था। जो दल सिर्फ वोट लेने के लिये समूची कौम को गद्दार बनाने पर तुली है , वो क्या क्या कर सकती है ये वक्त वक्त पर नजर आता ही रहता है।

2 comments:

Udan Tashtari said...

सारी कुछ वोट की खातिर की जा रही जुगत है और कुछ नहीं.

संजय बेंगाणी said...

अल्पसंख्यक होने की क्या कीमत चाहिये?