कभी पश्चिम बंगाल की अर्थव्यवस्था की रीढ़ कहे जाने वाले चाय उद्योग में बीते कुछ वर्षों से मंदी और तालाबंदी का जो दौर शुरू हुआ है उसने इन बागानों के मजदूरों को असमय ही लीलना शुरू कर दिया है. उत्तर बंगाल के जलपाईगुड़ी ज़िले में रहीमाबाद चाय बागान दो साल से बंद है, यहाँ काम करने वाले सुखिया का परिवार भरपेट भोजन और साफ पानी के लिए मोहताज है। जीवन की बाकी सुविधाओं की कौन कहे।
- इन बागानों मे काम करने वाले मजदूरों का हाल जानते है उन्ही कि जुबानी ।
- "कभी इस बागान की हरी पत्तियाँ सोना उगलती थीं लेकिन इनके सूखने के साथ ही हमारी ज़िंदगियाँ भी सूखने लगी हैं. मेरी पाँच पुश्तें यही काम करते-करते खप गईं लेकिन अब लगता है कि बेरोज़गारी और भूख के कारण मेरी भी जान चली जाएगी."
यह कहते हुए सुखिया उराँव की आँखें भर आती हैं.
यह कहते हुए सुखिया उराँव की आँखें भर आती हैं.
- राज्य सरकार के स्वास्थ्य विभाग और एक गैर-सरकारी संगठन की ओर से कराए गए एक सर्वेक्षण में इस बात का पता चला है कि इलाक़े में अरसे से बंद 14 चाय बागानों में पिछले साल पहली जनवरी से इस साल 31 मार्च यानी 15 महीनों के दौरान 571 मज़दूरों की मौत हो गई है.
राज्य सरकार इन मौतों की वजह तरह-तरह की बीमारियों को बताती है जबकि ग़ैर सरकारी संगठनों का कहना है कि इन मौतों की असली वजह भूख और कुपोषण है।
राज्य सरकार इन मौतों की वजह तरह-तरह की बीमारियों को बताती है जबकि ग़ैर सरकारी संगठनों का कहना है कि इन मौतों की असली वजह भूख और कुपोषण है।
- इन सब के बावजूद हमारी सरकारो को कोई फर्क नही पड़ता। हमारी अर्थवय्वस्था दहाई का अंक छूने वाली है। इन खबरो को कोई नही सबके सामने लाने कि कोशिश करेगा। शायद सच सबके लिये मूड खराब करने वाला ही होता है। क्या आप के लिये भी सच ऐसा ही है।
No comments:
Post a Comment