एक क्रोधी अंधा कहीं चला जाता था कि एक अंधे कुएं में गिर परा और लगा पुकारने के, चलियो दौड़ियो लोगों. मैं कुएं में गिर पड़ा. लोग तरस खा दौड़ कर वहां गए और कुएं के पनघटे पर खड़े होके उसके निकालने का उपाय करने लगे.
कुछ बेर जो हुई तो वह भीतर से रिसाय के बोला कि शीघ्र निकालते हो तो निकालो नहीं तो मैं किधर ही को चला जाता हूँ, मुझे फिर न पाओगे।
Wednesday, 27 June 2007
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