राष्ट्रपति बनने के लिए मारामारी शुरू हो चुकी है। ये पहला मौका नही है जब राष्ट्रपति पद के लिये इतनी राजनीती हो रही है। वीवी गिरी और संजीवा रेड्ड़ी के बीच 1969 की राष्ट्रपति पद की चुनावी होड़ के बाद शायद अब पहली बार ये चुनाव चर्चा का विषय बना है।
-हालत ये है कि अगर आप किसी बाज़ार या नुक्कड़ में आम जनता के बीच भी ये सवाल पूछें तो सभी राष्ट्रपति कैसा हो इस पर अपनी राय व्यक्त करते नज़र आते हैं.
शायद जनता के राष्ट्रपति या पीपुल्स प्रेसीडेंट के नाम से पहचाने जाने वाले राष्ट्रपति एपीजे अब्दुल क़लाम, राष्ट्रपति के पद को छोटे-बड़े सभी के मानस पटल तक पहुँचाने में सफल हुए हैं।
- यूपीए और वाम दलों के पास ५.2 लाख मत हैं, एनडीए के पास 3.5 लाख और अन्य क्षेत्रीय दलों के पास 1.2 लाख मत हैं.शायद जनता के राष्ट्रपति या पीपुल्स प्रेसीडेंट के नाम से पहचाने जाने वाले राष्ट्रपति एपीजे अब्दुल क़लाम, राष्ट्रपति के पद को छोटे-बड़े सभी के मानस पटल तक पहुँचाने में सफल हुए हैं।
- आम जनता तो एक बार फिर अब्दुल कलाम को इस पद पर देखना चाहती है। लेकिन राजनीती मे हर बार वो नही होता जो आम जनता चाहती है। यहाँ २२ फीसदी वोट वाला दल इसे जनसमर्थन कह कर राज करता है। खैर राष्ट्रपति के चुनाव मे बहुमत का राज चलता है। इसे आम सहमती कहा जाता है। तो आप किसे चाहते है आपना राष्ट्रपति? मैं चाहता हु कि भारत का राष्ट्रपति फखरूद्दीन अली अहमद कि तरह केंद्र का चाकर ना हो कर , संविधान और हिंदुस्तानी जनता का प्रतिनिधि हो । शायद आप भी कुछ ऐसा ही चाहते होंगे।
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