संजय जी ने मेरे " एक रिपोर्ट " के कालम पर अपना मत ये दिया है कि , " अल्पसंख्यक होने की क्या कीमत चाहिये? "
- कीमत किसने मांगी है? और जो कीमत अल्प्संखयक दे रहे है, उसका कौन हिसाब देगा। मरीजो कि सेवा करने वाले " ग्राहम स्टेंस " को अपने बच्चो के साथ सिर्फ इस लिये जला दिया गया कि वो अल्प्संखयक थे।
- गुजरात का हिसाब, तो राम लीला मंडली दे ही चुकी है।
- हिंदुस्तान का एक अजीम फनकार आज अमेरिका और दुबई मे छुपा है। उस पर इल्जाम है कि उसने देवी देवताओ कि नंगी तस्वीरे बनाईं है। मान लिया कि उनकी तस्वीरो से किसी कि भावनाओ को ठेस पहुंची। लेकिन उसका क्या जो राजस्थान मे हुआ। आडवानी, जोशी, और अटल, ब्रह्मा, विष्णु और महेश बने। वसुंधरा , दुर्गा बन गई। उनके चमचे लोग , कुबेर और इंद्र बने। तब किसी भाई कि भावना को क्यो नही ठेस पहुंची।
- गुंडे लोग धर्म के ठेकेदार बन कर , कलाकारो पर जुल्म कर रहे है। इसका हिसाब कौन देगा?
Wednesday, 6 June 2007
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3 comments:
आरक्षण माँगना कीमत मागँना ही तो हुआ. घर्म के जाति के भाषा के अल्पसंख्यक होने की कीमत.
भारत के सभी नागरीक समान है, फिर आरक्षण क्यों?
अब धर्म के नाम पर तो आरक्षण की माँग ना करो भाई...याद रखो आरक्षण माँग कर स्वव्यम को दयनीय क्यों बनाते हो
????? हिंदुस्तान का एक अजीम फनकार ????
Kamran Perwaiz भाई आप भूल रहे हे इस अजीम फनकार से बडे फ़नकार ओर भी हे.य़ूरोप मे जेसे डेन्मर्क??? दुसरी बात, आप आपने बच्चे का इलाज एसे Dr से करवओ गे जो आरक्षण से बना हो,???
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