Monday, 11 June 2007

यौन शिक्षा- २

हिंदुस्तान का कानून १८ साल कि उम्र मे सरकार चुनने का अधिकार देता है। तो क्या इस उम्र तक यौन शिक्षा देने कि जरुरत नही है? इस उम्र मे एक आम लडकी कि शादी हो जाती है। तो क्या ऐसे मे ये जरुरी नही है कि उसे पहले ही दाम्पत्य जीवन कि जरूरतो और सावधानियों कि जानकारी दे दी जाये।
- IPC के अनुसार १६ साल कि उम्र होने के बाद कोई भी लडकी यौन संबंध कायम कर सकती है। इस उम्र के पहले अगर उससे यौन संबंध कायम किया जता है तो वो बलात्कार कि कानूनी परिभाषा के अंतर्गत माना जाएगा। लेकिन १६ साल कि उम्र के बाद किसी लडकी का आपसी सहमती से किया गया यौन संबंध बलात्कार नही माना जाता। ऐसे मे क्या ये जरुरी नही हो जाता कि इस उम्र मे पहुचने से पहले ही उसे - पूर्व या विवाह्हेतेर यौन संबंधो से उत्पन्न परिस्थितियों का ज्ञान हो - और ऐसा बिना यौन जानकारी के हो सकना संभव नही है।
- यहाँ एक बात गौर करने कि है कि यौन भावना और यौन जानकारी का आपस मे कोई संबंध है कि नही। बहुतो का कहना है कि यौन जानकारी बच्चो मे गलत भावनाओ को उभारेगी। ये भारतीय संस्कृति को दूषित करेगी। लेकिन यौन जानकारी के बिना भी यौनेक्छा तो उपजेगी ही , और तब इसे समझना और संयमित करना और भी मुश्किल होगा। क्योकि चोरी छुपे हासिल कि गई जानकारी कैसे होगी ये कल्पना से बाहर है।
- कई बार ये भी कहा जाता है कि इस सब के बारे मे बच्चो को बडे लोगो से जानकारी सहज ही मिल जति है। लेकिन हमारा तथाकथिक पढा लिखा वर्ग भी यौन समस्यायों के बारे मे कितनी गलत जानकारिया रखता है, ये किसी से छिपा नही है।
- माहवारी आने पर कपड़ा बाँध लेने कि बात ही यौन शिक्षा तक सीमित नही है। हमारा महिला समाज अपनी देह को सुंदर दिखाने मे जितनी रूचि लेता , उसका चौथाई भी अगर शरीर कि समस्यायों को समझने मे लेता तो कई ऐसे बीमारियों से अपने को बचा सकता है जो बाद मे जानलेवा साबित होती है। इसलिये पुरुषो कि तुलना मे महिलाओ को तो यौन जानकारी देने कि और भी जरुरत है।
- एक बात ये भी है कि यौन शिक्षा का जो विरोध हो रहा है, उसके पिछे भी पुरुषवादी मानसिकता ही ज्यादा काम करती है। कुछ महिलाओ का भी मानना है कि लड़कियों को यौन जान्करिया देना , उन्हें केवल उपभोग कि सामग्री नही रहने देगा। ऐसे समाजो मे जहा बहुसंख्यक महिलाओ को "organism" के अनुभव का पता न हो , यौन शिक्षा देना पुरुष प्रभुत्व के लिये चुनौती भी बन सकता है। गौर करने कि बात है कि यौन शिक्षा का विरोध सिर्फ भारत मे ही नही बल्कि विदेशो मे जिनमे यूरोप और मध्य पूर्व के साथ अफ्रीकी देशो मे भी हो रहा है। और तो और अफ्रीकी मुल्को मे तो लड़कियों का "सुन्नत " भी किया जाता है , ताकी उन्हें ताजिंदगी यौन सुख का पता ही ना चल सके। चरित्रवान बनाए रखने का ये काम किया जाता ताकी वे अपने पुरुषो कि उपभोग कि सामग्री बनी रहे, और बच्चे जनती रहे। भारत मे तो अपने शरीर और मन कि बनावट और उन्हें कई तरह के ख़तरे से बचाने के लिये हिंदुस्तानी महिलाये तो क्या पुरुष भी मामूली जानकारी नही रखते।
- यौन जानकारी देने वाली शिक्षा न केवल खुद मे आत्मविश्वास लाती है, बल्कि इससे सामाजिक स्वास्थ्य भी बेहतर होता है।

4 comments:

अनूप शुक्ल said...

सही विचार हैं!

Sanjeet Tripathi said...

सत्य!

ललित said...

इसे स्कूलों में लागू करने के प्रयास में कई व्यावहारिक समस्याएँ सामने आईं हैं, लड़के/लड़कियों कौन शिक्षा दे- शिक्षिक/शिक्षिकाएँ? जरा-सी जानकारी मिलते ही आजकल बच्चे प्रैक्टिकल प्रयास करने लगते हैं, उन्हें कैसे रोकें? इससे कामुकता खले-आम बढ़ेगी। पहले महामाया के बुरे प्रभावों से रोकने, बचाने के लिए आत्मज्ञान, ध्यान, योग की वैज्ञानिक शिक्षा देना जरूरी है।

ePandit said...

यार आप यौन शिक्षा के पक्षधरों ने भी बरान कर दिया। दो जी शिक्षा हम कहाँ मना कर रहे हैं। :)

बस यह बताइए कि पढ़ाओगे क्या क्या?