- नयी नीतियों के लागु करने के बाद नए सरकारी उपक्रम तो नही ही लगे बल्कि पुराने धीरे धीरे बंद किये जाने लगे। सरकारी उपक्रमो का निजीकरण शुरू हो गया। VRS लागु किया गया और बडे पैमाने पर लोगो कि रोजगार से वंचित किया गया। भारत सरकार कि " आर्थिक समीक्षा २००६- २००७" के अनुसार कुल सरकारी नौकरिया ( राज्य एवम केंद्र ) १९९४ मे १ करोड़ ९४ लाख ४५ हजार थी। जो २००० मे १ करोड़ ९३ लाख १४ हजार और २००४ मे १ करोड़ ८१ लाख ९७ हजार हो गई। इससे पता लगना कठिन नही है कि भूमंडलीकरण के रोड रोलर ने "मंडल कमीशन " कि सिफारिशो को मटियामेट कर दिया।
- हालांकि १९९६ से २००४ तक कई वैचारिक रंगो कि सरकार आयी मगर किसी ने भी " वाशिंग्टन आम राय " पर विचार करने कि जहमत नही उठाई। ये किसी ने भी नही सोचा कि इसका गरीबो, आदिवासियो, दलितो और कमजोर वर्गों पर क्या असर हो रहा है।
- अब सरकार विदेशी विश्वविद्यालयों को भारत मे अपनी शाखा या यु कहे कि अपनी दुकान खोलने कि अनुमति प्रदान कर रही है। इसका क्या असर होगा? इसबारे मे कोई भी सरकारी प्रयास न होने थे न हुए। ये कोशिश भी गरीब गुर्बो को शिक्षा से वंचित करने का ही प्रयास है। क्योकि इन विदेशी विश्वविद्यालयों कि फी इतनी होगी जो गरीबो कि अंटी मे होनी नही है। दुसरा यहा सिर्फ उन्ही का आरक्षण होगा जो अमीर होंगे। एक बात और हमारे यहा विदेशी चिजो कि जो माँग है उस हिसाब से देखे तो देशी विश्वविद्यालयों कि डिग्री को कोई पूछेगा ही नही।
- हमारे विश्वविद्यालयों के प्रोफेसर विदेशी विश्वविद्यालयों मे मोटी रकम पर काम नही करे ऐसा कोई कानून सरकार नही बना सकती। फिर प्रतिभा पलायन कैसे रुकेगा?
4 comments:
भाई
इसको मैं सहेज कर रख रहा हूँ. इस पर गंभीरतापूर्वक और पूरा काम किए जाने की जरूरत है.
भूमण्डलीकरण में कोई 'आरक्षण' नहीं चलेगा, सिर्फ प्रतिभा और योग्यता तथा समुचित प्रतिफल लाभ प्रतिलाभ, आऊटपुट प्रदान करने वाले ही टिकेंगे। शेष थोथे छिलकों की तरह उड़ा कर फेंक दिए जाएँगे। निजीकरण, विनिवेश के इस दौर में प्रतीक्षा है कि किस दिन संसद और सरकार का भी निजीकरण होगा?
Afsos hota hai ki aaj aarakchan ko amir hone ka shortcut tarika man liya gaya hai.aarachan ke virodiyon ki soch par bhi taras aati hai. unka sochna hai ki aarakchan milne ke baad sc aur st ki sankhaya sarkari naukariyo ke liye badh jayegi.. par aye mere dost bina written nikla kya sc aur kya general.kisi ko bhi sarkari naukari nahi mil payegi.Aur jiske pass Qualification hoga woh koyu is sarkari naukari ke piche marega. aaj dusre kai chetro me mahine ki itni salary milti hai jitni sayad aapko sarkari naukari me 1 saal ke baad bhi na mile.
bahut accha kaha hai apne..
कर भी क्या सकते है?
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