Tuesday, 26 June 2007

मराठी मानुष कि जय

महाराष्ट्र के स्वयम्भू ठेकेदार बाल ठाकरे ने घोषणा कि है कि, राष्ट्रपति चुनाव मे उनकी जेबी पार्टी UPA उम्मीदवार प्रतिभा पाटिल का समर्थन करेगी। हालांकि ये राजनीती राज्य मे अपनी पार्टी को मजबूती देने के रणनीति के तहत कि गई है, लेकिन इससे ये बात तो साबित हो ही गई है कि शिवसेना कितनी संकुचित सोच वाली पार्टी है। इससे जहा एक तरफ UPA कि रणनीति सही साबित हुई है, वही BJP को मुँह कि खानी पडी है। एक कहावत है कि " चौबे जी, छब्बे जी बंनने गए और दुबे बन कर आ गए।" यही हुआ है NDA के साथ। भगवा दल तो दुसरे दलो को तोड़ने कि बात कर रहा था। " अंतरात्मा " कि आवाज से वोट करने कि बात कर रह था। अब बचाए अपनी पार्टी और अपने गठबंधन को।

1 comment:

अरविंद चतुर्वेदी said...

मि आप संकुचित मानसिकता पर प्रहार करना चाह रहे हैं या किसी विशेष पर। अगर आपको संकीणॻ सोच से घबराहट हो रही है तो यह व्यथॻ है। यह ॿणभंगुर है पल में पतन की ओर अग्रसर हो जाएगी। यह कोई विचारधारा नही है कि हम इसे सदीयों तक ज़िन्दा रख सकें। निश्चित तौर पर आज है कल नही होगी। मुझे अफ़सोस इस बात का है कि आज तक तुम न जाने क्यों पूवाॻग्रहों से निकल नही पाऐ हो। दफ्तर से लेकर घर तक कभी अपने वरिष्ठों तो कभी अपनों के पूवाॻग्रहों से तो हम दबें ही है। लेकिन यहां पर भी तुम......कम से कम मै तुम्हें एक तटस्थ व्यक्ति के किरदार में देखना पसन्द करूँगा। एक ग्रसित बीमार के रूप में नही। इस टिप्पणी पर तुम्हारे विचार जानने के इंतज़ार में।